इन्शुरन्स क्लेम कैसे करे – एक्सीडेंट क्लेम केस

जब किसी बीमित व्यक्ति या वस्तु का बीमा कराया जाता है तो दुर्घटना के पश्चात् या नुकसान होने के बाद इन्शुरन्स क्लेम करना पड़ता है लेकिन अधिकतर लोग को यह जानकारी नहीं होती है कि इन्शुरन्स क्लेम कैसे करे इसकी जानकारी अधिकतर बीमाधारी को न होने के कारण इन्शुरन्स क्लेम नहीं कर पाते है इसी विषय पर मैं आपको जानकारी देने वाला हूँ।

इन्शुरन्स करवाना बहुत आसान होता है लेकिन इन्शुरन्स क्लेम करने में काफी कठिनाई आती है अकसर नए बीमाधारी को इन्शुरन्स क्लेम करने के बारे में अधिक जानकारी नहीं होती है जिसमे इन्शुरन्स प्रदाता क्लेम के लिए काफी समय लेते बहुत ज्यादा दौड़ भाग करवाते है इसलिए इस विषय में जानकारी होना आवश्यक है।

बताते चले की इन्शुरन्स कई प्रकार की होती है जैसे हेल्थ इन्शुरन्स लाइफ इन्शुरन्स व्हीकल इन्शुरन्स टर्म इन्शुरन्स इसके अलावा भी कई अलग अलग प्रोडक्ट का इन्शुरन्स करवाया जाता है जोकि सभी इन्शुरन्स के क्लेम करने की प्रकिर्या भी अलग अलग होती है जिसके लिए बीमाधारी को इन्शुरन्स कंपनी से संपर्क में रहना होगा और उनसे इस विषय पर बात करना होगा की किस तरह क्लेम फाइल कर सकते है।

कई बार इन्शुरन्स क्लेम करने के लिए FIR करना पड़ता है ये अक्सर व्हीकल इन्शुरन्स में होता है जब व्हीकल किसी दुर्घटना पूरी तरह टूट फुट जाता है या उससे भारी नुकसान हो जाता है तो इस अवस्था में बीमाधारक को इसके लिए पुलिस स्टेशन में एफआईआर करने के बाद कार्यवाई की जाती है इसके अलावा हेल्थ इन्शुरन्स और लाइफ इन्शुरन्स क्लेम करने की प्रकिर्या अलग होती है।

इन्शुरन्स क्लेम कैसे करे?

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Insurance Claim करने से पहले बीमित व्यक्ति के पास नुकसान का प्रमाण होना ज़रूरी है जैसे मोटर व्हीकल के बीमा के क्लेम के लिए व्यक्ति के पास नुकसान होने प्रमाण होना ज़रूरी है दुर्घटना कहा हुआ है उसका FIR हुआ की नहीं ये सारे डॉक्यूमेंट इन्शुरन्स कंपनी को पेश करना होता है फिर इन्शुरन्स कंपनी नुकसान का मुआवजा देती है।

जिस वस्तु का बीमित व्यक्ति बीमा करवाता है उसके नुकसान पर बीमाप्रदाता कंपनी मुआवजा देती है लेकिन उससे पहले बीमाप्रादाता कंपनी नुकसान का प्रमाण मांगती है की आपका किस तरह कैसे कितना नुकसान हुआ है जिसका बीमित व्यक्ति के पास प्रूफ होना चाहिए तभी इन्शुरन्स कंपनी क्लेम को स्वीकार करेंगी।

वही स्वस्थ बीमा या जीवन बीमा के क्लेम के लिए बीमित व्यक्ति को उपचार में खर्चे के प्रमाण दिखने होंगे उसके अतिरिक्त जीवन बीमा में व्यक्ति के मृत्यु पर मुआवजा मिलता है उसके लिए परिवार के सदस्य को मृत्यु का प्रमाण पेश करना होता है फिर मुआवजा बीमा कंपनी के द्वारा मृतक के परिवार को मिलता है।

क्लेम के लिए बीमित व्यक्ति को कई चीजों का ध्यान देना होता है जैसे वाहन के दुर्घटना पर क्षतिग्रस्त होने पर कितना नुकसान आया है उसका बीमाधारी को एक एविडेन्स देना होगा तभी बीमित व्यक्ति के द्वारा पेशा किया गया क्लेम स्वीकार किया जायेगा और बीमित वस्तुओ के लिए क्षतिग्रस्त होने पर उनके प्रमाण दिखाने होंगे तभी इन्शुरन्स क्लेम होगा।

बीमित व्यक्ति के द्वारा क्लेम करने के पश्चात बीमाप्रदाता कंपनी के द्वारा पूरी तरह से जाँच की जाती है जो क्लेम पेश किया गया है इसमें कितना सत्यता है कई इन्शुरन्स कंपनी मुआवजा देने में आनाकानी भी करती है जिसमे बीमाधारी कई चीजों को सही ढंग से पेश नहीं कर पाते है और बीमाप्रदाता को लगता है यह सही नहीं है तो उनके क्लेम को कई बार अस्वीकार कर दिया जाता है।

एक्सीडेंट क्लेम केस।

मोटर व्हीकल इन्शुरन्स में अकसर दुर्घटना होने पर क्लेम किया जाता है इसमें कई बार व्हीकल किसी दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हो जाता है या किसी दूसरे व्हीकल को क्षतिग्रस्त कर देता है जिसमे कई चीजों का नुकसान होता है उस नुकसान का भरपाई इन्शुरन्स कंपनी करती है।

लेकिन इन्शुरन्स कंपनी से मुआवजा लेने के लिए कई प्रकिर्यो को पूरा करना होता है जैसे व्हीकल का दुर्घटना होने पर एफआईआर दर्ज करनी होती है जिसमे बीमा कंपनी को यह समझने में आसानी होता है की किस जगह पर दुर्घटना हुआ है और दुर्घटना में कितना नुकसान हुआ है कितने लोगो की जान गयी है ये सारी चीजे उसमे मेंशन होती है।

जिससे बीमा कंपनी को जोखिम को समझने और क्लेम को स्वीकार करने में आसानी होती है इसलिए दुर्घटना होने के बाद Fir दर्ज करना आवश्यक होता है।

बीमा कंपनी से मुआवजा लेने के लिए दुर्घटना होने तक बीमा वैध होना चाहिए ड्राइवर का लाइसेंस होना चाहिए यदि नहीं होता है तो बीमा कंपनी मुआवजा देने से एक कदम पीछे खींचती है इसलिए इन सभी चीजों का ख्याल रखना होगा।

इन्शुरन्स क्लेम कैसे करे?

क्लेम के लिए नुकसान के सभी प्रमाण को लेकर बीमाप्रदाता को पेश करना होता है उसमे कई ज़रूरी कागजात की आवश्यकता होती है और दुर्घटना के प्रमाण के साथ खर्चे के प्रमाण को बीमाप्रदाता कंपनी को पेश करना होता है फिर कंपनी क्लेम को स्वीकार करती है उस बीमित व्यक्ति को मुआवजा देती है।

आशा है इस लेख में बताई गयी जानकारी आपको समझ आयी होंगी आपके द्वारा खोजे जा रहे प्रश्न का उत्तर मिला होगा ऐसी ही जानकारी भरे पोस्ट इस ब्लॉग पर डेली बेसेस पर शेयर किये जाते है अधिक जानकारी के लिए हमारे ब्लॉग पर पब्लिश अन्य आर्टिकल पढ़ सकते है।

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